- "अंदाज़ कुछ अलग हैं मेरे सोचने का,,
सब को मंजिल का शौक है और मुझे
रास्तों का ..
ये दुनिया इसलिए बुरी नही के यहाँ बुरे
लोग ज्यादा है।...
बल्कि इसलिए बुरी है कि यहाँ अच्छे
लोग खामोश है..! - रास्ते पर कंकड़ ही कंकड़ हो
तो भी एक अच्छा जूता पहनकर
उस पर चला जा सकता है..
लेकिन यदि एक अच्छे जूते ...
के अंदर एक भी कंकड़ हो तो
एक अच्छी सड़क पर भी
कुछ कदम भी चलना मुश्किल है ।।
यानी -
"बाहर की चुनोतियों से नहीं
हम अपनी अंदर की कमजोरियों
से हारते हैं " - "तुझे मै चाँद कहु ये मुमकिन तौ है,........
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मगर लौग तुम्है रात भर दैखे ये मुझे गँवारा नही....!!
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Monday, November 2, 2015
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